आधुनिक समाज में पर्यावरण संरक्षण के लिए जन जागरूकता अभियान जरूरी हैं।

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महाराम साँवरिया@कोटा। मनुष्य होने के नाते हमारा जो कर्तव्य पथ हैं। हम उसका ईमानदारी एवं सही दिशा की ओर निरंतर कदम बढ़ाएंगे। हम सब चाहते हैं की शिक्षित परिवार के बच्चे इस प्रकृति की सुंदरता को और बेहतर ढंग से आकर्षण का केंद्र बिंदु बनाकर स्वयं इस कार्य में जुड़ जाएं जिससे पेड़.पौधों की ठंडी छांव मनुष्य के हृदय को तरासते हुए आपके भीतर प्रकृति के प्रति अंतर्मन भाव पैदा करें। लेकिन ये तब संभव होगा जब हम आलसए ईर्ष्या और कुंठा का त्याग करेंगे। हम लोगों से जुड़कर एक टीम बनाकर इस पुण्य कार्य को आरंभ कर सकते हैं ताकि अधिक से अधिक पेड़.पौधों की संख्या को बढाकर स्वच्छ सुंदर प्रकृति को जीवन प्रदान कर सके साथ ही विषैली हवा एवं प्रदूषित कल.कारखानों के धुंआ चौकड़ी से भी बचे रह सकते हैं। हमें हर हाल में नया कदम उठाने की आवश्यकता है घर.घर जाकर पेड़ पौधों की जीवन रक्षा सूत्र का पाठ पढ़ाने की जरूरत हैं।

शहर से गांव तक जन जागरण की जरूरत हैं। परि जो हमारे चारों ओर है ष्आवरणष् जो हमें चारों ओर से घेरे हुए है। पर्यावरण उन सभी भौतिक रासायनिक एवं जैविक कारकों की इकाई है जो किसी जीवधारी अथवा इंसानी आबादी को प्रभावित करते हैं। आज पर्यावरण एक जरूरी सवाल ही नहीं बल्कि ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है लेकिन आज लोगों में इसे लेकर कोई जागरूकता नहीं है। ग्रामीण समाज को छोड़ दें तो भी महानगरीय जीवन में इसके प्रति खास उत्सुकता नहीं पाई जाती। परिणामस्वरूप पर्यावरण सुरक्षा महज एक सरकारी एजेण्डा ही बन कर रह गया है। जबकि यह पूरे समाज से बहुत ही घनिष्ठ सम्बन्ध रखने वाला सवाल है।

जब तक इसके प्रति लोगों में एक स्वाभाविक लगाव पैदा नहीं होताए पर्यावरण संरक्षण एक दूर का सपना ही बना रहेगा। पर्यावरण का सीधा सम्बन्ध प्रकृति से है। अपने परिवेश में हम तरह.तरह के जीव.जन्तुए पेड़.पौधे तथा अन्य सजीव.निर्जीव वस्तुएँ पाते हैं। ये सब मिलकर पर्यावरण की रचना करते हैं। परन्तु आज की आवश्यकता यह है कि पर्यावरण के विस्तृत अध्ययन के साथ.साथ इससे सम्बन्धित व्यावहारिक ज्ञान पर बल दिया जाए। आधुनिक समाज को पर्यावरण से सम्बन्धित समस्याओं की शिक्षा व्यापक स्तर पर दी जानी चाहिए। साथ ही इससे निपटने के बचावकारी उपायों की जानकारी भी आवश्यक है। हम सब शपथ लें की अब पर्यावरण को सुरक्षित करने हेतु अपना योगदान देगें।

महाराम साँवरिया
लेखक व स्वतंत्र पत्रकार
कोटा, राजस्थान

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