राजस्थान का वो गाँव जहाँ नहीं है एक भी मंदिर, मरने के बाद नहीं होता अस्थि विसर्जन

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चुरू: अपने प्रियजनों की अस्थियां आमतौर पर लोग नदी में बहाते हैं लेकिन राजस्थान के चूरू जिले में एक ऐसा गांव है जहां मृतकों की अस्थियां नदी में बहाई नहीं जाती है। इस गांव का नाम है लांबा की ढाणी। यहां लोग मेहनत और कर्म पर यकीन रखते हैं। किसी धार्मिक कर्मकांड में यकीन नहीं करते हैं। लांबा की ढाणी में लोग मृतकों की अस्थियां नदी में विर्सजन के लिए नहीं ले जाते।

एक भी मंदिर नही– खास बात यह है कि तारानगर तहसील के इस गांव में एक भी मंदिर नहीं है। यहां कोई अन्य धार्मिक स्थल नहीं है। यहां के रहवासियों के मुताबिक, 65 साल पहले यहां के लोगों ने तय कर लिया था कि किसी की भी मौत पर दाह संस्कार के बाद नदी में अस्थियों का विसर्जन नहीं किया जाएगा। वे इन अस्थियों को दोबारा जलाकर राख कर देते हैं।

मेहनत पर भरोसा– यहां के निवासियों के मुताबिक गांव के लोग अंधविश्वास और आडंबर से दूर रहकर मेहनत पर विश्वास करते हैं। यहां के लोग प्रशासनिक सेवा से लेकर खेलों में गांव का नाम रोशन कर रहे हैं। ऐसा भी नहीं है कि गांव के लोगों को भगवान पर विश्वास नहीं है। सभी भगवान को मानते हैं और कर्म और मेहनत पर पूरा विश्वास करते हैं।

इतने घर– यहां 105 घर हैं और गांव में जाट समुदाय के 91 परिवार, नायक समुदाय के 4 घर और मेघवालों के 10 परिवार हैं। यहां के 30 लोग सेना में, 30 लोग पुलिस में, 17 लोग रेलवे और 30 से ज्यादा लोग मेडिकल फिल्ड में हैं और गांव का नाम रोशन कर रहे हैं।

 

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