कोटा से सांसद ओम बिड़ला लोकसभा अध्यक्ष चुने गए, राष्ट्रपति के द्वारा निश्चित की गयी सूचना

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विकास पाठक@MHR। राजनीति में रहते हुए ओम बिड़ला ने कई ऐसे काम किए हैं, जिन्हें उनके निर्वाचन क्षेत्र के लोग याद करते हैं। उन्होंने गरीब, बुजुर्ग, ​​विकलांग और असहाय महिलाओं की मदद करने का कभी कोई मौका नहीं छोड़ा। 17वीं लोकसभा का गठन हो चुका है। सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार को लगातार दूसरे दिन नवनिर्वाचित सदस्य शपथ लेंगे। इस बीच भारतीय जनता पार्टी के नेता और राजस्थान में कोटा से सांसद ओम बिड़ला अगले लोकसभा अध्यक्ष चुने जा चुके है। इस खबर पर ओम बिड़ला की पत्नी डॉ. अमिता बिड़ला ने खुशी जतायी और कहा कि यह गर्व की बात है। उन्हें इस पद के लिए चुना इसके लिए भारत के प्रधानमन्त्री को धन्यवाद।
ओम बिड़ला राजस्थान का बड़ा वैश्य चेहरा: विकलांगों को मुफ्त साइकिल, व्हीलचेयर और कान की मशीन भी बंटवाते हैं ओम बिड़ला। ओम बिड़ला राजस्थान का बड़ा वैश्य चेहरा हैं। उन्होंने गरीब, बुजुर्ग, ​​विकलांग और असहाय महिलाओं की मदद करने का कभी कोई मौका नहीं छोड़ा। विभिन्न सामाजिक संगठनों के जरिए क्षेत्र के विकलांग, कैंसर रोगियों और थैलेसेमिया रोगियों की मदद में वे हमेशा आगे रहे हैं।
अध्यक्ष चुने जाने का प्रस्ताव: लोकसभा अध्यक्ष का निर्वाचन लोकसभा के सदस्यों के द्वारा किया जाता है। निर्वाचन की तिथि राष्ट्रपति के द्वारा निश्चित की जाती है। राष्ट्रपति के द्वारा निश्चित की गयी तिथि की सूचना लोकसभा महासचिव सदस्यों को देता है। निर्वाचन की तिथि के एक दिन पूर्व के मध्याह्न से पहले किसी सदस्य द्वारा किसी अन्य सदस्य को अध्यक्ष चुने जाने का प्रस्ताव महासचिव को लिखित रूप में दिया जाता है। यह प्रस्ताव किसी तीसरे सदस्य द्वारा अनुमोदित होना चाहिए। इस प्रस्ताव के साथ अध्यक्ष के उम्मीदवार सदस्य का यह कथन संलग्न होता है कि वह अध्यक्ष के रूप में कार्य करने के लिए तैयार है। निर्वाचन के लिए एक या अधिक उम्मीदवारों द्वारा प्रस्ताव किये जा सकते हैं। यदि एक ही प्रस्ताव पेश किया जाता है, तो अध्यक्ष का चुनाव सर्वसम्मत होता है और यदि एक से अधिक प्रस्ताव प्रस्तुत होते हैं, तो मतदान कराया जाता है। मतदान में लोकसभा के सदस्य ही शामिल होकर अध्यक्ष का बहुमत से निर्वाचन करते हैं।
शक्तियाँ और कार्य: लोकसभा-अध्यक्ष लोकसभा के सत्रों की अध्यक्षता करता है और सदन के कामकाज का संचालन करता है। वह निर्णय करता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं। वह सदन का अनुशासन और मर्यादा बनाए रखता है और इसमें बाधा पहुँचाने वाले सांसदों को दंडित भी कर सकता है। अध्यक्ष ही यह तय करता है कि सदन की बैठक में क्या एजेंडा लिया जाना है।
वेतन और भत्ते: लोकसभा अध्यक्ष को राज्यसभा के सभापति (उपराष्ट्रपति) के समान मासिक वेतन एवं अन्य भत्ते मिलते हैं। मई, 2002 को संसद द्वारा पारित एक संशोधन विधेयक के अनुसार यदि लोकसभा के अध्यक्ष की मृत्यु उसके पद पर रहने की अवधि में ही हो जाती है तो उसके परिवार यानी पति या पत्नी को पेंशन, आवास और स्वास्थ्य सुविधाएँ मिला करेंगी। ध्यातव्य है कि यह सुविधा अब तक राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति पदों के लिए ही थीं। साथ ही लोकसभाध्यक्ष को केन्द्रीय मंत्री के समान भत्ता देने का भी प्रावधान किया गया है।
कार्यकाल अवधि और पदमुक्ति: अध्यक्ष का कार्यकाल लोकसभा विघटित होने तक होता है। कुछ स्थितियों में वह इससे पहले भी पदमुक्त हो सकता है-लोकसभा अध्यक्ष को लोकसभा के प्रभावी बहुमत द्वारा हटाया जा सकता है। परंतु 14 दिन पहले इसकी सूचना लोक सभा अध्यक्ष को देनी आवश्यक है।

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